Monday, November 25, 2019


मत करो ताकीद मुझसे, मै कोई मौला नहीं
बेखबर हु जिंदगी भी क्या मझे ठुकराएगी
किस तरफ मंज़िल है जाती वो डगर जो सामने
कौन रास्ते जाऊ जीता जा रहा हु ख्वाब मे
वक्त सबको एक एक जामा वहीं पहनाएगा
डरते क्योंहो मौत भी आखिर नंगी होती है
कब तक पूछोगे यूहीं राहे मुसाफिर लोगो से
थाम कर सुना ये रास्ता चल दो मेरे साथ मे
बेखबर हु मै मगर है वक्त सब कुछ जानता
जानता मै क्या उसे, क्याये नहीं वो जानता
कई रंगो के ये चेहरे कोई पन्ना कोरा हु
मिट गया है रंग धब्बा या अभी की दास्ता
और कविताएं पढ़ने के लिए कृपया मेरा कविता संग्रह खरीदे ।
नमस्कार पाठकों


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