मेरा स्नेह मुझे क्यों नहीं पाता हैं
हर बार कहीं दूर चला जाता हैं ।
मेरा वो दोस्त भी नहीं जो मेरी तरफ
बन के याचक बस वही गिड़गिड़ाता हैं ।
मै पुछता हुं तो मिलती है सिर्फ ख़ामोशी
उसे हर बात क्यों जाके वो बताता हैं
वो नाचीज़ लात मार देता फिर भी
उसकी हर बात पर वो क्यों इतराता हैं
एक दिन सब्र का टूट गया साया,
मैंने पूछा तुझे क्या मिलता है
जो जाता हैं
बोला मै क्यों जाऊंगा भला
खुद चल कर यो
वो खुद मुझे बुलाने आ जाता हैं।
कहता है, तेरा मालिक भले देखे न कभी
तू ही बस तब, बाकी रह जाता हैं ।
मेरा दोस्त मुझे अब भी याद आता है
हर बार कहीं दूर चला जाता हैं ।
मेरा वो दोस्त भी नहीं जो मेरी तरफ
बन के याचक बस वही गिड़गिड़ाता हैं ।
मै पुछता हुं तो मिलती है सिर्फ ख़ामोशी
उसे हर बात क्यों जाके वो बताता हैं
वो नाचीज़ लात मार देता फिर भी
उसकी हर बात पर वो क्यों इतराता हैं
एक दिन सब्र का टूट गया साया,
मैंने पूछा तुझे क्या मिलता है
जो जाता हैं
बोला मै क्यों जाऊंगा भला
खुद चल कर यो
वो खुद मुझे बुलाने आ जाता हैं।
कहता है, तेरा मालिक भले देखे न कभी
तू ही बस तब, बाकी रह जाता हैं ।
मेरा दोस्त मुझे अब भी याद आता है
No comments:
Post a Comment