तू हसता हैं नजरे मिलाता नहीं है
लाख कहकर भी, कुछ भी बताता नहीं है
है दिल में तेरे क्या,छिपाता ही रहता
तुझे तेरा साथी भी, भाता नहीं है ।
लाख कहकर भी, कुछ भी बताता नहीं है
है दिल में तेरे क्या,छिपाता ही रहता
तुझे तेरा साथी भी, भाता नहीं है ।
तुझे फ्रिक कितनी है, गैरो में मेरी
मेरे सामने फिर भी, आता नहीं है
करे दुश्मनी, तू तो कहता हैं दुश्मन
मगर दुश्मनी को निभाता नहीं है ।
मेरे सामने फिर भी, आता नहीं है
करे दुश्मनी, तू तो कहता हैं दुश्मन
मगर दुश्मनी को निभाता नहीं है ।
तड़पती हैं नजरे, भुला जख्म सारे
भुला करके मुझको, तू जाता कहीं है
मुझे फैसला करना कितना है मुश्किल
तू दुश्मन है, दोस्त बताता नहीं है ।
भुला करके मुझको, तू जाता कहीं है
मुझे फैसला करना कितना है मुश्किल
तू दुश्मन है, दोस्त बताता नहीं है ।
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