Monday, November 25, 2019



तू हसता हैं नजरे मिलाता नहीं है
लाख कहकर भी, कुछ भी बताता नहीं है
है दिल में तेरे क्या,छिपाता ही रहता
तुझे तेरा साथी भी, भाता नहीं है ।
तुझे फ्रिक कितनी है, गैरो में मेरी
मेरे सामने फिर भी, आता नहीं है
करे दुश्मनी, तू तो कहता हैं दुश्मन
मगर दुश्मनी को निभाता नहीं है ।
तड़पती हैं नजरे, भुला जख्म सारे
भुला करके मुझको, तू जाता कहीं है
मुझे फैसला करना कितना है मुश्किल
तू दुश्मन है, दोस्त बताता नहीं है ।

प्रांशु वर्मा
लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश २६२८०२


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