Monday, November 25, 2019


तेरी याद मुझको ही आती हैं क्यों
मै कितनी भुलाने की कोशिश करूं
तू मुझको ही आके रुलाती है क्यों
वो तस्वीर तेरी, जो खो भी गई
मेरी आज तकदीर भी रो रही
न कोई है मेरा, सताती है क्यो
अकेले में आंसू बहाती है क्यों
मानता हूं, की चाहा था मैंने तुझे
तूने चाहा नहीं, फिर भी आती है क्यो
आज मुझको तू अपना बताती है क्यो
तोड़ कर शीशा, लब से लगाती है क्यो
तेरी याद, मुझको ही, आती है क्यो


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