Monday, November 25, 2019


भूली अखियां आज निहारे
तेरी प्रीत न बिसरी मोहे
तू मोहे काहे बिसारे
भूली अखियां....!
दिन बीते आवे जो रतिया
नैना ना चंदा निहारे
कड़के बादल चमके बिजुरिया
मन हिचकोले खावे रे
तेरी आस बंधी रह जावे
पानी बिन जो जो मीन तपड़ती
मोहे तड़पाती आवे रे
भूली अखियां.....!
सब कहती अब कजरी आई
तोरे सजन न आए
छोड़ अगन वो किसकी खातिर
तोहे आज भुलाए
आ जा बदरी बरस मोरा
जियरा जलता जो जाय
मेरी तपन पिया तक ले जा
आकर मुझे दिखा रे
भूली अखियां आज निहारे ।


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