छोटी सी गौरया अब दुनिया से नाता तोड़ रही
अपने ही पालनकर्ता का अब वो सहारा छोड़ रही
इंसानों की सखी सहेली अब न जाती बसेरो मे
उनके संगी साथी सब है रहते सदा थपेड़ो मे
यह दुनिया की आपाधापी नन्हे प्राणों को हरती है
गौरया बदले इन संगी साथी जन से डरती है
कब तक यू संकल्पित होगे अब तो तुम कुछ कार्य करो
थोड़ा सार्थक श्रम अपने साथी के
जीवनार्थ करो
जीवनार्थ करो
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