Wednesday, January 2, 2019

सफलता क्या है ?

सफलता क्या है ?     
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हम प्राय हर दिन किसी न किसी से सुनते है कि सफल बनो । सफल बनने के लिए अमुक कार्य करो या फिर अमुक व्यक्ति सफल है । हमारे सबके मन में यह इच्छा जरूर होती है कि हम एक सफल व्यक्ति बने । अगर हमसे कहा जाए कि सफलता की सीमा क्या है । सफलता का अनुभव कैसा और कहा तक होता है तो शायद यह प्रश्न हमें परेशान कर सकते है । हम सफल होना है, लेकिन हमें उसी सफलता की पूरी जानकारी नहीं है । यह ठीक उसी तरह है जैसे हमारे सामने हमारा निशाना ही धुधला है और हम तीरंदाजी में माहिर होना चाहते है । सफल होने से पहले यह जरूरी है कि हम जान पाए कि सफलता है क्या ?
हर व्यक्ति के लिए सफलता के मायने अलग अलग है । एक व्यक्ति एक शिक्षा विभाग की नौकरी करके भी सफल व्यक्ति है तो दूसरा देश देशान्तर में विख्यात होकर भी असफल है । यह भी एक विचारणीय तथ्य है । हम सफल है या नहीं यही जानकारी हमारे मस्तिष्क में हमारे लिए सफलता की परिभाषा को निर्धारित करता है। यह बात ध्यान रखने योग्य है कि सफलता की परिभाषा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग अलग होती है।  यदि कोई व्यक्ति एक सैनिक बनने के पश्चात यह सोचता है कि वह सफल हो गया तो वह व्यक्ति निश्चित तौर पर सफल हो गया । लेकिन उसी सैनिक का कमांडर एक असफल व्यक्ति भी हो सकता है क्योंकि वह चाहता है कि वह सेना का एक उच्चाधिकारी बने ।
यहां पर हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि जब उच्च अधिकारी ही असफल है तो हम कर्मचारी को एक सफल व्यक्ति कैसे कह सकते है । दरअसल यही हमारे ऊपर किए गए इस प्रश्न का उत्तर है कि सफलता की अधिकतम सीमा क्या है ?
यही सफलता की अधिकतम सीमा है । एक सैनिक के लिए सफलता कि सीमा उसके सैनिक बनते ही समाप्त हो गई जबकि उसका नायक अभी और उच्च पद पर जाना चाहता है सो उसने अभी सफलता या सफलता कि अंतिम सीमा को नहीं पाया है । वह अभी एक असफल व्यक्ति है ।
हम कह सकते है कि व्यक्ति सफलता को प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ करने से पूर्व ही सफलता की आधी यात्रा समाप्त कर लेता है । वो बहुत जल्दी सफल हो जाते है जिनके रास्ते कम दूरी के होते है । जबकि दूर की सोचने वाले व्यक्तियों को सफल होने में पूरा जीवन लग जाता है । सफलता की परिभाषा अर्थात दूसरे प्रश्न का यही उत्तर है ।
एक नौकर, एक मालिक और एक राष्ट्र पति तीनों का सफलता स्तर समान है । वास्तव में सफलता के संदर्भ में यह तीनों बराबर है क्योंकि एक राष्ट्रपति का सफल होना उसका राष्ट्रपति बनना है और एक नौकर का सफल होना उसका नौकर बनना ।
वह लोग महान शक्तियों और सारे विश्व में विख्यात होते हुए भी कभी सफल नहीं होते जो महत्वाकांक्षी होते है । जो अपनी सफलता की परिभाषा को तो बहुत जल्दी ही निर्धारित कर लेते है लेकिन सफलता की सीमा का निर्धारण कभी नहीं करते । हिटलर, नेपोलियन, समुद्रगुप्त, लेलिन और अजातशत्रु ऐसे ही व्यक्तियों के उदाहरण है । वर्तमान राहुल गांधी भी एक ऐसी ही शख्सियत है ।वह व्यक्ति सफल होते हुए भी सदैव असफल रहता है जो सफलता की सीमा को नहीं जानता ।
इसलिए यश की चाह रखने वाले हर व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कभी यह न सोचे की उसे क्या बनना है । दरअसल यही सबसे बड़ी रुकावट है, हमारे बीच जो हमे एक इतिहास पुरुष बनने से रोकती है । हमारी जो बनने की इच्छा होती है हम उसे सफलता जैसे उस वाक्य को अर्थ दे देते है जो हमारी उस बनने की इच्छा से बहुत बड़ा है । हम जाने अनजाने अपनी सफलता को सीमित कर उसे एक सीमा दे देते है । हम यदि इस सीमा का निर्धारण न करते तो शायद अपनी इच्छाओं से भी अधिक प्राप्त कर सकते थे ।


जनसत्ता कि ताकत पाकर हिटलर तानाशाह हुआ, जनसत्ता की खेल गोद में नेपोलियन आबाद हुआ । जिस जनसत्ता के आगे टूटा साम्राज्य ब्रितानी का...